काम कम दिखावा ज्यादा

जिन्दगी के बहुत ज्यादा दिन तो मैंने नौकरी नहीं की। पर नौकरी की लाईफ का अपना ही मजा है। नौकरी काकल्चर तो धीरे-धीरे अब मेरे समझ में गया है। बहुत बढ़िया काम कर लेने से कोई अच्छा नौकर नहीं बन सकता। अच्छा नौकर बनने के लिए काम कम और दिखावा ज्यादा होना चाहिए। तभी तो लोगों को लगेगा कि कोई काम कर रहा है। उसके पहले वाला तो एक दम बेकार था। एक देहाती कहावत है मूतना कम हिलाना ज्यादा। यह पता नहीं कब का बना है बट है बहुत सटीक। जिसको काम से ज्यादा दिखाना आता है वही अच्छी नौकरी कर सकता है। वही नौकरी में आगे बढ़ता है और वही सबका चहेता होता है। जो मन से काम करता है उसके ऊपर और काम दे दिया जाता है क्योंकि काम के लिहाज से वही बढ़िया गधा है। जो बिना टेंसन बोझ उठाए चला जाएगा। जोबड़े वाले हैं उनका तो पूछना ही क्या वो तो बिना काम के भी इतना बिजी होते हैं कि लोग उसके तनाव को देखकर ही उसको काम नही देते की बेचारा कितना बिजी है। अगर किसी ने कह दिया तो खरा सा जवाब भी मिल जाएगा कि अरेआप देख नहीं रहे कितना काम मैं कर चुका हूँ और कितना मेरे पास पड़ा है। जो काम गधा टाइप का कोई कर्मचारी दो घंटे में कर देगा। वो काम वही दो दिन में करेंगे। और वो भी पूरी तल्लीनता से बिना समय गवाएं। कौन उसको क्या सपोर्ट नहीं कर रहा है वो बॉस को पहले पता चल जाएगा भले ही सपोर्ट बाद में मांगा जाए।

11 टिप्पणियाँ:

दिल दुखता है... 24 मई 2009 को 7:31 pm बजे  

हिंदी ब्लॉग की दुनिया में आपका स्वागत है...

Unknown 24 मई 2009 को 7:53 pm बजे  

waah waah sacchi baat
badhai

अमिताभ त्रिपाठी ’ अमित’ 24 मई 2009 को 8:55 pm बजे  

ब्लॉग की दुनियाँ में आपका स्वागत है। मुहावरों के प्रयोग में भाषा की सावधानी बरतें। शुभकामनायें!

Ashok Kumar pandey 24 मई 2009 को 9:20 pm बजे  

ब्लाग जगत में स्वागत

रचना गौड़ ’भारती’ 24 मई 2009 को 11:46 pm बजे  

स्वागत है
लिखते रहे
मेरे ब्लोग पर स्वागत है

गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर 25 मई 2009 को 7:45 am बजे  

noukari matlab noukari. narayan narayan

alka mishra 25 मई 2009 को 11:45 am बजे  

प्रिय बन्धु, मैं अमित जी से सहमत हूँ ,लेखों की भाषा शिष्ट होनी चाहिए ,अगर आप सभ्य नागरिक हैं तो ......

शशांक शुक्ला 25 मई 2009 को 12:37 pm बजे  

सही कहा बंधु दुनिया का दस्तूर यही है कि करो कम दिखाओ ज्यादा क्योंकि लोगों को दिखाओगे नहीं तो पता कैसे चलेगा की काम क्या किया है

बेनामी 25 मई 2009 को 3:53 pm बजे  

kripaya bhasha par jyada mehnat karle to aur bhi achcha lagega.

संगीता पुरी 26 मई 2009 को 12:30 am बजे  

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

मीडिया दूत 16 जून 2009 को 8:33 pm बजे  

जिंदगी एक दिखावा है मित्र...करो भले चाहे कुछ नहीं पर दिखाओ कि आप बहुत कुछ करतेहैं

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