आगे....
दो दिन का काम पूरे हफ्ते में करने वालों की कला का तो कुछ कहना ही नहीं। ऐसे लोग अन्य कर्मचारियों से जल्दी आफिस पहुंच जाते हैं। जब कोई अन्य आफिस में पहुंचता है तो अगला कई कम्प्यूटर खोले अकेले बैठा है। सभी कम्प्यूटर के सामने कुछ न कुछ फाइल या कापी या अन्य चीजे फैली हुई मिलेगी। कभी इस टेबल पर तो कभी उस टेबल पर भटकते हुए काम करता है। ऐसे बिजी व्यक्ति को आप भी जानते होंगे।
कुछ कर्मचारी तो ऐसे कन्फ्यूज होते हैं कि एक ही काम कई बार अलग-अलग तरीके से करते हैं और अन्त में अपने ही पहले वाले काम को डन कर देते हैं। लेकिन वो काफी व्यस्त होते हैं और पूरे आफिस में उनकी चर्चा होती है।
कई बड़े वाले तो कोई काम करना ही नहीं चाहते, करते भी हैं तो वही जो मजबूरी हो। मजबूरी वाले काम में भी वो अन्तिम समय तक दिमाग लगाते हैं कि किसी और सिर मढ़ दिया जाए। और घर जाते समय उनके दिमाग में यही होता चलो भाई एक दिन और बीता। कल की कल....
...काम कम दिखावा ज्यादा
प्रस्तुतकर्ता
Anugrah Pratap Singh
रविवार, 24 मई 2009


2 टिप्पणियाँ:
कल की कल.... देखी जायेगी :)
वीनस केसरी
kal ki kal.........
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